भारत और रूस के बीच लगातार गहराते तेल संबंधों को लेकर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने नई दिल्ली पर अतिरिक्त 25% tariff लगाते हुए मौजूदा प्रतिबंधों को और सख्त कर दिया है, जिससे अब कुल tariff 50% तक पहुंच गया है।
इस कदम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इस फैसले को “अनुचित और अविवेकपूर्ण” करार दिया। मंत्रालय ने साफ़ कहा कि भारत का तेल आयात उसकी energy security से जुड़ी जरूरतों के चलते किया जा रहा है, और यह पूरी तरह से national interest में है।
Donald Trump’s New Tariff Order: What Happened?
Donald Trump यहीं नहीं रुके — उन्होंने इशारा किया कि चीन के साथ इसी तरह के व्यापारिक संबंधों को लेकर secondary sanctions लगाए जा सकते हैं, जिससे global trade में और तनाव बढ़ सकता है।
बुधवार (स्थानीय समय) को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से एक press conference के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि जब कई देश अब भी रूस से तेल आयात कर रहे हैं, तो ऐसे में new tariff policy के तहत सिर्फ भारत को ही क्यों target किया गया है?
Donald Trump ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा:
White House में मीडिया से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत पर लगाए गए नए Tariff के बारे में पूछे गए सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देखिए, अभी तो सिर्फ़ आठ घंटे ही हुए हैं। ये तो बस शुरुआत है। आगे आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होने वाला है। आप जल्द ही कई नए developments देखेंगे – और हां, इसमें कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध भी शामिल हो सकते हैं।“
Donald Trump की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका आने वाले दिनों में भारत और संभवतः अन्य देशों के खिलाफ और भी सख्त आर्थिक कदम उठा सकता है, खासकर उन देशों के खिलाफ जो रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखे हुए हैं।

Donald Trump का यह बयान उस फैसले के तुरंत बाद आया है जिसमें अमेरिका ने भारत से होने वाले तेल आयात पर tariff को दोगुना कर दिया। नए कदम के तहत, उन्होंने मौजूदा शुल्क में 25% का additional increase करते हुए कुल tariff को 50% तक पहुंचा दिया है। यह निर्णय भारत-रूस के बीच गहराते ऊर्जा व्यापारिक संबंधों की प्रतिक्रिया स्वरूप लिया गया है, जिसे washington रणनीतिक रूप से चिंताजनक मान रहा है।
जब Donald Trump से यह सवाल किया गया कि क्या रूस से तेल खरीदने को लेकर चीन को भी भारत जैसी ही पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है, तो उन्होंने इशारा किया कि ऐसी संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
Donald Trump के इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका की निगाहें अब केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि उन सभी देशों पर हैं जो रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
“ऐसा मुमकिन है। फिलहाल मैं इसकी पुष्टि नहीं कर सकता,” trump ने कहा। “हमने भारत के खिलाफ यह कदम उठाया है, और संभव है कि हम अन्य देशों पर भी इसी तरह की कार्रवाई करें। उनमें से एक चीन भी हो सकता है।”
US Imposed Extra Tariffs on Indian Imports
बुधवार को राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए घोषणा की कि भारत पर पहले से लगाए गए 25% tariff के अतिरिक्त अब और 25% charge जोड़ा जाएगा, जिससे कुल tariff 50% हो जाएगी। पहले से लागू 25% tariff rate 7 अगस्त 2025 से प्रभावी होगी, जबकि हाल ही में घोषित अतिरिक्त शुल्क दर आगामी 21 दिनों के भीतर लागू कर दी जाएगी।
इस आदेश के लागू होने के बाद, सीमित अपवादों की सूची को छोड़कर, अमेरिका में भारत से होने वाले सभी आयात पर कुल मिलाकर 50% combined tariff लागू होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह मूल्य आधारित (ad valorem) शुल्क—भारत से होने वाले आयात पर पहले से लागू किसी भी अन्य शुल्क, कर, या tax के अतिरिक्त लिया जाएगा।
आदेश में कहा गया है, “मुझे जानकारी मिली है कि भारत सरकार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी संघ से तेल का आयात कर रही है। इसी के चलते, और अमेरिका के लागू कानूनों के तहत, अब संयुक्त राज्य अमेरिका के सीमा शुल्क क्षेत्र में भारत से आने वाले सभी आयातों पर 25% की अतिरिक्त ad valorem (value wise) duty लगाई जाएगी।”
India Calls Tariff Increase – ‘inappropriate and unreasonable’
भारत ने इस tariff बढ़ोतरी पर तुरंत और सख्त प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे “अनुचित, असंगत और अविवेकपूर्ण” क़रार देते हुए कड़े शब्दों में इसकी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल आयात का भारत का फ़ैसला पूरी तरह से बाज़ार की वास्तविक ज़रूरतों और देश की 1.4 billion population की energy security को ध्यान में रखकर लिया गया है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ज़ोर दिया कि देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अमेरिका के इस tariff फ़ैसले को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और आपसी सम्मान जैसे मूलभूत सिद्धांतों के लिए नुकसानदायक बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में अमेरिका ने भारत के रूस से तेल आयात को लेकर बार-बार सवाल उठाए हैं। इस पर भारत पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुका है कि उसका तेल आयात पूरी तरह बाज़ार की स्थितियों और 1.4 billion की आबादी की ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
मंत्रालय ने कहा, “ऐसे में यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर ऐसे क़दमों के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का रास्ता चुना है, जिन्हें कई अन्य देश भी अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के तहत उठा रहे हैं।” MEA ने इस निर्णय को ‘अनुचित, अव्यावहारिक और विवेकहीन’ करार देते हुए ज़ोर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
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