राष्ट्रपति Trump जल्द ही रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात करने वाले हैं, और इस बैठक में होने वाला संभावित समझौता भारत पर लगाए गए punitive US tariff के औचित्य को कमजोर कर सकता है। वहीं, चीन और यूरोपीय संघ जैसे देश रूसी तेल की खरीद जारी रखेंगे, लेकिन उनके खिलाफ अब तक किसी तरह की penalty की घोषणा नहीं की गई है।
India and Brazil Hit With Record 50% US Tariffs
भारत अब उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिन पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा सबसे ज़्यादा trade US tariff लगाए गए हैं। Trump प्रशासन ने भारत और ब्राजील — इन दोनों देशों के लिए अमेरिका में export होने वाले products पर 50% तक का संयुक्त शुल्क निर्धारित किया है।

यह अब तक की सबसे ऊंची US tariff दरों में से एक मानी जा रही है। भारत को यह सज़ा रूसी तेल के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को लेकर दी गई है, जबकि ब्राजील पर tariff की वजह अमेरिका के साथ व्यापार घाटा बताया जा रहा है। इन कड़े निर्णयों ने international business relationship में नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं, जिनका असर global markets पर भी दिखना तय है।
फिलहाल भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% US tariff पहले से ही प्रभावी है। अब राष्ट्रपति Donald Trump ने एक अतिरिक्त 25% शुल्क जोड़ने की घोषणा की है, जिसे उन्होंने रूस से तेल खरीदने के लिए ‘penalty’ बताया है। यह नया शुल्क अगले 21 दिनों के भीतर, यानी 28 अगस्त से लागू हो जाएगा, जिससे कुल US tariff rate 50% तक पहुंच जाएगी।
NYT द्वारा जारी किए गए tariff rate chart में Syria 41% tariff के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि Loas और Myanmar 40% की rate के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। इस list में शामिल टॉप पांच देशों में भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो इसे global level पर इस tariff निर्णय का सबसे प्रभावशाली उदाहरण बनाता है।
हालांकि trump के तर्क को कई मोर्चों पर चुनौती दी जा रही है, लेकिन भारत उनके निशाने पर खास तौर से है। Trump का कहना है कि जो देश रूस से तेल खरीद रहे हैं, वे Ukraine के खिलाफ उसकी ‘war machine’ को fuel देने का काम कर रहे हैं।
Upcoming Trump-Putin Meet May Undermine Justification for US Tariffs on India
हालांकि, आने वाले कुछ हफ्तों में trump की मुलाकात रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से होने वाली है, जहां Ukraine पर हमला इस बैठक का प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। संभावित समझौता न केवल अमेरिका-रूस संबंधों को नया मोड़ दे सकता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करेगा कि रूस से तेल खरीदने पर भारत जैसे देशों पर लगाए गए कड़े US Tariff वाकई उचित हैं या नहीं।
Modi and Brazil’s Lula Discuss about US Tariffs
इसी बीच, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को Brazil के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva से बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने bilateral relations और global issues पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान अन्य मुद्दों के साथ-साथ हाल ही में लगाए गए US tariff को लेकर भी चर्चा की।
जहाँ Brazil के राष्ट्रपति Lula, Trump के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं भारत ने भी बार-बार यह तर्क दिया है कि अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल असंगत है बल्कि global trade के सिद्धांतों के खिलाफ भी है।
Example के तौर पर, कई यूरोपीय देशों द्वारा भी रूसी कच्चे तेल का Import किया जा रहा है, लेकिन अमेरिका की ओर से उनके खिलाफ ऐसी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
चीन दुनिया भर में रूस से energy import करने वाले प्रमुख देशों में से एक है, इसके बावजूद उस पर अभी तक अमेरिका द्वारा कोई punitive tariff लागू नहीं किया गया है। US Commerce Secretary Howard Lutnick ने यह स्पष्ट किया है कि चीन के साथ जिन tariff समझौतों पर वर्तमान में चर्चा चल रही है — जो अभी 10% से 30% के बीच के स्तर पर हैं — उनकी समय-सीमा को 90 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
हालाँकि भारत को लेकर रूस और चीन दोनों ने अब तक मोदी सरकार के रुख का समर्थन किया है या कम से कम उसे स्वीकार किया है, क्योंकि वे एक तेजी से Multipolar बनती दुनिया में अमेरिका के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
News agency AFP से बातचीत में Russian spokesman Dmitry Peskov ने कहा, “हर sovereign country को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह किन देशों के साथ व्यापार करे, यह फैसला उसका स्वयं का अधिकार है।”
As US Tariffs Hit India, Chinese Ambassador Criticizes Trump’s Move
गुरुवार को, जब भारत पर US tariff का पहला चरण लागू हुआ, चीन के भारत में Ambassador Xu Feihong ने social media पर पोस्ट कर Donald Trump की आलोचना की और उनके कदमों को अनुचित ठहराया।
Xu Feihong ने X (formerly twitter) पर post करते हुए लिखा, “अगर आप किसी धमकाने वाले को एक इंच भी जगह देते हैं, तो वह पूरा मील लेने की कोशिश करता है।”
Experts का मानना है कि वर्तमान समय में अमेरिका द्वारा US tariff को एक negotiation strategy के रूप में उपयोग किया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब 2022 में Ukraine war शुरू होने के बावजूद कई देशों ने रूस के साथ अपना व्यापारिक संबंध बनाए रखा है।
CMS INDUSLAW में taxation firm partner, Shashi Mathews ने Financial Express को दिए बयान में कहा, ‘चीन और यूरोपीय यूनियन जैसे देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका खुद भी Russian Oil और अन्य सामग्रियों का import कर रहा है।
Mathews ने टिप्पणी करते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि यह एक strategic move है, जिसका उद्देश्य trade negotiations में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करना है… चूंकि ये US Tariff तुरंत प्रभावी नहीं होकर 21 दिनों बाद लागू होंगे।”
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