उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस हादसे में कई लोगों के बह जाने की आशंका जताई जा रही है, जबकि जान-माल के भारी नुकसान की भी संभावना है। प्रशासनिक टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
Uttarakhand Flood 2025: Massive Destruction in Dharali
Uttarakhand के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को दोपहर के समय भारी बारिश के कारण खीर गंगा नदी में अचानक आई Flood ने तबाही मचा दी। ये तबाही समुद्र तल से करीब 8,600 feet की ऊंचाई पर बसे धराली कस्बे में देखने को मिली, जहां नदी का जलस्तर अचानक इतना बढ़ गया कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 60 से 70 लोगों के लापता या मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
Uttarakhand flood की भयावहता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने धराली कस्बे के बीच से बहते हुए पूरे Market area को कुछ ही मिनटों में नष्ट कर दिया। स्थानीय निवासियों द्वारा record किए गए video footage में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह खीर गंगा का उफनता पानी विशाल लहरों की तरह बहते हुए हर चीज को अपने साथ बहा ले जा रहा है – चाहे वो होटल हों, घर हों या लोग।
तेज़ बहाव के कारण कम से कम 25 से अधिक इमारतें – जिनमें होटल, गेस्ट हाउस और रिहायशी मकान शामिल हैं – पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। क्षेत्र में फैले मलबे, कीचड़ और बर्बादी की तस्वीरें अब social media (Uttarakhand flood) पर भी सामने आ रही हैं। इन तस्वीरों को देखकर साफ महसूस किया जा सकता है कि लोगों को भागने तक का समय नहीं मिला।

तेज़ बहाव वाली बाढ़ (uttarakhand flood) की चपेट में आकर होटल, गेस्ट हाउस और कई घरों समेत कम से कम 25 इमारतें पूरी तरह से तबाह हो गईं। ज़िला प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 60 से 70 लोगों के लापता होने या मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन इलाके की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ rescue operation में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।
Uttarakhand Flood: उत्तरकाशी में बादल फटे
उत्तरकाशी में बादल फटने की भयावह घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की। उन्होंने स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। इस समय स्थानीय प्रशासन और NDRF (National Disaster Response Force) की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
धराली में मौजूद लोगों के अनुसार, अचानक आई इस बाढ़ (uttarakhand flood) से पहले कुछ ही मिनटों में मौसम खराब हुआ और फिर मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इससे खीर गंगा नदी में पानी का बहाव इतना तेज़ हो गया कि लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले पानी घरों में घुस चुका था। लोगों को अपने पड़ोसियों को चिल्लाकर भागने की चेतावनी देते हुए सुना गया।
प्रभावित क्षेत्र में राहत पहुंचाना भी चुनौती बन गया है, क्योंकि धराली जैसे पहाड़ी इलाकों में सड़कें संकरी हैं और कई जगहों पर संपर्क मार्ग पूरी तरह से टूट गए हैं। helicopter के ज़रिए राहत सामग्री भेजी जा रही है और साथ ही drone से भी सर्वे किया जा रहा है कि किन इलाकों में लोग अब भी फंसे हुए हैं।
जिला प्रशासन की एक प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कई Tourists जो धराली में छुट्टियां मना रहे थे, अब लापता हैं। प्रशासन की चिंता यह भी है कि Uttarakhand flood के बाद भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है, जिससे Rescue Operations और अधिक मुश्किल हो सकते हैं।
राज्य सरकार ने emergency number जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल सरकारी updates पर भरोसा करें। साथ ही प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं जहां उन्हें खाना, दवाइयाँ और ज़रूरी मदद पहुंचाई जा रही है।
Uttarakhand flood का हादसा न केवल वहां के निवासियों के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कितने गंभीर हो सकते हैं।
हालांकि प्रशासनिक मशीनरी अपनी पूरी ताक़त से राहत और बचाव कार्य में लगी है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए हमारी तैयारियाँ पर्याप्त हैं?
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